जिलेट: तीन का साल — अंक 4

Gillette: The Year of Three — ACT 4 — The First Blade, My Gillette, chapter 08

पहला ब्लेड, मेरी जिलेट · हिंदी संस्करण  ·  क्रमांक 08

जिलेट: तीन का साल — अंक 4


मार्च की उस सुबह अभी बहुत सवेरा था जब किसी ने दरवाज़े की घंटी बजाई।

सब फ़ौरन पूछने लगे कि कौन हो सकता है। मेरी बेटी जॉर्जा मुस्कुराई और उसने पूरे यक़ीन से एलान किया:
“आख़िरकार। वे तुम्हें गिरफ़्तार करने आए हैं।”

निकला बस डाकिया।

पिछली शाम वह एक तार पहुँचाना भूल गया था। इस डर से कि यह ग़लती कहीं उसकी नौकरी न ले बैठे, उसने भोर में ही उसे सुधारने की ठान ली। उसके लिए वक़्त, लगता है, एक मामूली-सी बात थी।

मेरी पत्नी ने जिज्ञासा में तार खोला। उसमें लिखा था:
“परम आदरणीया महोदया और उनके पति को 30 मई को रेज्जो कालाब्रिया के आर्कन सभागार में होने वाले आयोजन में पधारने का न्योता दिया जाता है, जिसका शीर्षक है: वर्ष 1993 में जन्मे जुड़वाँ।
उपस्थिति की पुष्टि के लिए कृपया यह तार मिलने के तीन दिन के भीतर सचिवालय से संपर्क करें। आप पर कोई ख़र्च नहीं आएगा।”

हमने एक-दूसरे को देखा।
तैंतीस साल बीत चुके थे। ऐसे आयोजन रोज़-रोज़ नहीं होते। हमें जिज्ञासा थी।

मेरी पत्नी ने फ़ौरन अपनी हिदायतों की मुहिम छेड़ दी।
ढंग से पेश आना।
जोश में आकर कुछ मत कर बैठना।
शांत रहना और होश में रहना।
वे हमें जो भी दें, ले लेना।
फिर चुपचाप घर चले आना।
यह कहते हुए वह मुस्कुरा रही थी।
वह अच्छी तरह जानती थी कि भेड़िये को यह समझाना कि भेड़ों के बीच कैसे पेश आए, आम तौर पर वक़्त की बरबादी है।
हाहाहा।

आख़िर आयोजन का दिन आ पहुँचा।
सभागार खचाखच भरा था। हमने किसी को नहीं पहचाना। कम से कम मैंने तो नहीं।
वक़्त ने सबके चेहरे बदल दिए थे।
अजीब बात यह कि लगभग कोई भी अपने बच्चों को साथ नहीं लाया था।

कार्यक्रम एक वक्ता से शुरू हुआ, एक प्रसूति विशेषज्ञ, जो उन बरसों में क्लिनिक में काम करती थीं।
उन्होंने याद किया कि 1993 असाधारण साल रहा था।
जुड़वाँ बच्चों के चौवन जन्म हुए थे।
उनमें से इक्यावन लड़कियाँ थीं।
सिर्फ़ तीन लड़के थे।

उसके बाद क्लिनिक के निदेशक मंच पर आए और उन तीन जोड़ों को आगे आने का न्योता दिया जिन्होंने जुड़वाँ लड़के पैदा किए थे।
जब मैंने अपना उपनाम सुना, मेरी पत्नी ने चुपके से क्रॉस का निशान बनाया।
एक नया रोमांच शुरू हो रहा था।
वह जानती थी कि मैं बोलूँगा।
बस यह नहीं जानती थी कि मैं क्या बोलने वाला हूँ।

पहले जोड़े से पूछा गया कि उनके ख़याल से उनके जुड़वाँ जन्म की वजह क्या रही। पति ने जोश से जवाब दिया कि शायद अच्छे खाने और ज़बरदस्त जुनून ने ही निर्णायक भूमिका निभाई।
दर्शकों ने ठहाका लगाया और तालियाँ बजाईं।

दूसरे जोड़े से भी वही सवाल पूछा गया।
इस बार पत्नी ने जवाब दिया, यह सुझाते हुए कि हो सकता है किसी उन्नत हार्मोन उपचार ने किसी तरह नतीजे पर असर डाला हो।

फिर हमारी बारी आई।
मेरी पत्नी ने झट से, मुझसे पहले, माइक्रोफ़ोन पर क़ब्ज़ा कर लिया।
उसने समझाया कि जुड़वाँ जन्म मेरे ख़ानदान के इतिहास में चलते आए हैं: मैं ख़ुद, मेरे पिता, और उनसे पहले मेरे दादा।
उसकी नज़र में, यह तो होना ही था।
लगभग स्वाभाविक।
सब कुछ सुरक्षित ढंग से आगे बढ़ रहा था।

फिर उसने वह घातक ग़लती करने की कोशिश की।
उसने माइक्रोफ़ोन मुझे थमाना चाहा।
मैंने उसे लपक लिया।
यह ज़िंदगी में एक बार मिलने वाला मौक़ा था।
मैं उसे गँवा नहीं सकता था।

मैंने समझाया कि उन बरसों में मैं जिलेट के लिए थोक कारोबार में काम कर रहा था।
ज़ाहिर है, मैंने कहा, जुड़वाँ जन्मों को समझाना आसान है।
यह वही सिद्धांत था जो हमारे प्रमोशनों का था:
दो लो, एक के पैसे दो।
पूरा हॉल ठहाकों से फट पड़ा।

इस प्रतिक्रिया से हौसला पाकर, मैं आगे बढ़ा।
“1993 एक कड़ी मेहनत का साल था। एक न भूलने वाला साल। पर मैं यह भी साफ़ कर देना चाहूँगा कि उससे पहले मुझे यहाँ मौजूद किसी भी महिला से मिलने का सौभाग्य कभी नहीं मिला।”

महिलाएँ मुस्कुराईं।
पति कुछ कम मुस्कुराए।
ब्रह्मांड में एक संतुलन लौट आया।

आख़िरकार आयोजन ख़त्म हुआ, और हम निकास की तरफ़ बढ़े।
हम बस निकल ही रहे थे कि कई महिलाओं ने मुझे रोक लिया।
“श्रीमान जिलेट नैरेटिव,” उन्होंने पुकारा।

और उसी पल मुझे एक बात समझ आई।
साल गुज़र जाते हैं।
चेहरे बदल जाते हैं।
यादें धुँधली पड़ जाती हैं।
पर कहानियाँ लोगों से तेज़ सफ़र करती हैं।
मैं फर्दिनांदो बनकर पहुँचा था।
न जाने कैसे, मेरी कहानियाँ मुझसे पहले पहुँच चुकी थीं।


फर्दिनांदो

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