अलविदा, माँ जिलेट
THE COMPANY · 09
जिलेट–ड्यूरासेल अधिग्रहण
सौदे के समय जिलेट का नेतृत्व
अल्फ़्रेड एम. ज़ाइन — बोर्ड के चेयरमैन और चीफ़ एग्ज़ीक्यूटिव ऑफ़िसर — वह आदमी थे जिन्होंने वॉरेन बफ़े का पूरा भरोसा जीता, जो नेब्रास्का की निवेश कंपनी बर्कशायर हैथवे के सबसे बड़े शेयरधारक थे।
बरसों तक ज़ाइन फलते-फूलते रहे। कारोबार बढ़ा। मुनाफ़ा बढ़ा। शेयरधारकों को इनाम मिला।
उनकी जिलेट मैन वाली शैली हर कमरे में, हर दफ़्तर में, हमारी कामकाजी ज़िंदगी के हर पल में भरी रहती थी। उस समय हम क़रीब 25,000 कर्मचारी थे, प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष।
मूल्य, परिवार, मिशन, नेतृत्व की शैली, तालीम, और यह विश्वास कि इंसान मुनाफ़े से पहले आता है, दीवार पर लिखे हुए शब्द भर नहीं थे। वे कंपनी की संस्कृति का हिस्सा थे।
इनाम साफ़ दिखता था।
जिलेट का शेयर अक्सर साल की शुरुआत बीस से पच्चीस डॉलर के आसपास करता था और बारह महीने बाद अक्सर पचपन से साठ के बीच ख़त्म होता था।
वे शान के बरस थे।
कंपनी मुनाफ़े में थी, और गोदाम के कर्मचारी से लेकर चेयरमैन तक, लोगों को उसका हिस्सा होने पर गर्व था।
फिर उत्तराधिकार आया।
माइकल सी. हॉली, ज़ाइन के नंबर दो, ज़ाइन का कार्यकाल पूरा होने के बाद आख़िरकार सीईओ बने।
हॉली ने ही ड्यूरासेल के अधिग्रहण का संचालन किया, जिसका एलान 12 सितंबर 1996 को हुआ और जो उसी साल 30 दिसंबर को पूरा हुआ।
हॉली मानते थे कि बैटरियाँ ऊँचे मूल्य-वर्धन का कारोबार हैं।
उन्हें ऐसे उत्पाद दिखे जिनकी वितरण लागत अंतिम बिक्री मूल्य का बस एक छोटा हिस्सा थी।
वे मानते थे कि बैटरी का कारोबार ब्लेड जैसे मार्जिन दे सकता है।
जो बात वे कभी पूरी तरह नहीं समझ पाए, मेरी राय में, वह यह थी कि बैटरियाँ आख़िरकार उत्पादन का कारोबार थीं। इससे ज़्यादा कुछ नहीं।
सौदे के समय जिलेट की क़ीमत लगभग 8.8 अरब डॉलर थी, जबकि ड्यूरासेल का मूल्य मोटे तौर पर 2.1 अरब डॉलर आँका गया था।
फिर भी कोई उस बाज़ार को परखने को तैयार नहीं दिखा जो आगे चलकर बाद की मुश्किलें पैदा करने वाला था।
विलय के बाद, संयुक्त कंपनी का सालाना कारोबार लगभग 10.9 अरब डॉलर रहा।
ड्यूरासेल की तरफ़ चेयरमैन और सीईओ चार्ल्स आर. पेरिन थे।
अधिग्रहण पूरा होने के कुछ ही समय बाद, मैनेजमेंट का अंतिम ढाँचा पूरी तरह तय होने से पहले ही, पेरिन कंपनी छोड़ गए।
उन अलिखित समझौतों में से एक, जो बड़े कॉरपोरेट सौदों में हमेशा मौजूद जान पड़ते हैं, पहले ही चल पड़ा था।
हर किसी को जगह मिलनी थी।
किसी को बहुत जल्दी हटाया नहीं जा सकता था।
हर किसी को एक कुर्सी चाहिए थी।
हॉली ने उस आपसी समझ का मान रखा।
पर उन्होंने वह फ़ैसला भी लिया जो, मेरी नज़र में, निर्णायक मोड़ बन गया।
उन्होंने जिलेट के पारंपरिक नेतृत्व का ढाँचा हटा दिया और ओरल-बी तथा ब्रॉन से आए अधिकारियों को आगे बढ़ाया।
इंजीनियर आ गए।
और बहुत जल्द साफ़ हो गया कि वे कारोबार को कितनी अलग नज़र से देखते थे।
उन्होंने ही वह मशहूर दावा गढ़ा था:
“ड्यूरासेल पाँच गुना तक ज़्यादा चलती है।”
जो बात उपभोक्ता शायद ही कभी समझ पाए, वह यह थी कि यह पूरी श्रेणी पर लागू कोई परम सत्य नहीं था।
संदेश बैटरी की बदलती तकनीकों के इर्द-गिर्द गढ़ा गया था।
बाज़ार बुनियादी और सस्ते समाधानों से अल्कलाइन तकनीक की तरफ़ बढ़ा, जिसे ज़्यादा भरोसेमंद और ज़्यादा देर चलने वाली बताकर पेश किया गया।
फिर आई सेगमेंटेशन की जानी-पहचानी रणनीति।
पहले प्लस।
फिर अल्ट्रा।
और स्तर।
और पोज़िशनिंग।
और दाम।
ये मैनेजर विज़िबिलिटी, सेकंडरी प्लेसमेंट और कई जगहों पर डिस्प्ले की बातें करते नहीं थकते थे।
उन्होंने एक सीधा सबक़ सीखा था:
जिस उत्पाद का बदलने का चक्र होता है, उसे जल्दी बेचना पड़ता है।
सेल-आउट तेज़ करने का सबसे तेज़ तरीक़ा है उत्पाद को हर उस जगह रख देना जिधर उपभोक्ता सिर घुमाए।
फ़र्श पर स्थायी डिस्प्ले नियम बन गए।
मक़सद साफ़ था:
उपभोक्ताओं को ब्रांड से टकरा दो।
बार-बार।
और फिर एक बार।
जो बात भूलना मेरे लिए अब भी मुश्किल है, वह यह है कि जिलेट के कारोबार का बस एक अंश कमाने वाला धंधा आख़िरकार पूरे संगठन पर हावी हो गया।
और, मेरी नज़र में, उसने उसका बहुत कुछ ढहा दिया जिसने जिलेट को अनोखा बनाया था।
उसके बाद यह समझना आसान हो गया कि वॉरेन बफ़े ने आख़िरकार जिलेट का प्रॉक्टर एंड गैंबल को बिकना क्यों मान लिया।
पी एंड जी पिछले बरसों में पहले भी जिलेट को ख़रीदने की कोशिश कर चुकी थी।
उनमें से एक कोशिश खुलेआम शत्रुतापूर्ण थी।
पहली पेशकशें ठुकरा दी गई थीं।
आख़िरी कामयाब रही।
जो खोया, वह उत्पाद नहीं थे।
जो खोया, वह संस्कृति थी।
पहचान।
कंपनी और उसके ग्राहकों के बीच का रिश्ता।
नए सिस्टम थोप दिए गए।
बिलिंग के प्लेटफ़ॉर्म बदल दिए गए।
लॉजिस्टिक्स के प्रोग्राम आपस में ठीक से बात नहीं कर पाए।
ग्राहक सेवा को चोट पहुँची।
क़रीब एक साल तक उथल-पुथल रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा बन गई।
और वहीं, मेरे लिए, कहानी ख़त्म हुई।
उत्पाद बच गए।
ब्रांड बच गए।
पर कुछ और नहीं बचा।
जिलेट का दिल बदल गया।
अलविदा, माँ जिलेट।
फर्दिनांदो
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