मेन्स जिलेट, स्टोरी
THE FAMILY · 07
शैतान लड़का।
“एन्ज़ो,” मेरी माँ ने मेरे पिता से कहा, “हमें इसे बोर्डिंग स्कूल में डालना होगा।
मुझसे अब नांदो नहीं सँभलता।
उसे क़ाबू में रखना नामुमकिन है।
उससे भी बुरी बात यह है कि वह कब क्या कर बैठे, कोई नहीं जानता।”
वह ज़रा रुकी।
“तुम्हें पता है आज उसने क्या किया?”
“नहीं। बताओ।”
“वह मेरे साथ दुकान में था और, मुझे पता चले बिना, लंबी कैंची ग़ायब हो गई।
वही, जिससे मैं कपड़ा काटती हूँ।
कपड़े के तीस मीटर वाले थान।
मुझे दूसरी कैंची से काम चलाना पड़ा।
मैं लगभग एक घंटे तक ढूँढ़ती रही।
फिर मैंने उसे लौटते देखा।
शांत।
मुस्कुराता हुआ।
हाथ में कैंची लिए।”
मेरे पिता ने नज़र उठाई।
“वह कहाँ गया था?”
“कैफ़े में।”
“क्या करने?”
“हमारा बेटा पाँच साल का है, एन्ज़ो।
तुम उसके पिता हो।
बेवक़ूफ़ों की तरह हँसने के बजाय थोड़ी ज़िम्मेदारी लेकर तो देखो।
मुझे चिंता हो रही है।
इसका आगे क्या होगा?”
मेरी माँ डरी हुई थी।
लेकिन जब मैं लौटा, तो अकेला नहीं था।
ओर्फ़ेओ कैफ़े का मालिक, रोक्को पिज़्ज़िमेंती, मेरे साथ आया था।
वह इतनी ज़ोर से हँस रहा था कि ठीक से खड़ा भी नहीं हो पा रहा था।
रोक्को के मुताबिक़, उसे अक्सर मुझे बेवफ़ा बीवी का पति कहने में मज़ा आता था।
उस दोपहर मैंने यह मामला निपटा देने का फ़ैसला कर लिया था।
“पता है इसने क्या किया?” रोक्को बोला।
“यह वो कैंची लेकर कैफ़े में आया।
मेरा गला काटने।
मैं इससे दूरी बनाए रहा और इसका मज़ाक़ उड़ाता रहा।
पूरा कैफ़े हँस रहा था।
लेकिन यह हार मानने को तैयार ही नहीं था।
आख़िर में इसे घसीटकर ले जाना पड़ा।”
मेरे पिता हँसे।
रोक्को हँसा।
ग्राहक हँसे।
मैं नहीं हँसा।
आख़िरकार रोक्को ने मुझे बेवफ़ा बीवी का पति कहना बंद कर दिया।
तभी उसे समझ आया कि मैं ठीक वैसा नहीं हूँ जैसा उसने सोचा था।
मेरी माँ इस नतीजे पर बहुत पहले पहुँच चुकी थी।
अगली सुबह वह मुझे सीधे बोर्डिंग स्कूल ले गई।
सेंट विंसेंट की सिस्टर्स।
उसने दाख़िले की फ़ीस और पूरे साल की पढ़ाई की फ़ीस एक ही बार में चुका दी।
बीमा।
अड़तालीस घंटे के भीतर मेरी वापसी के ख़िलाफ़।
उसने मदर सुपीरियर से आगे मेरे साथ होने वाले बर्ताव को लेकर एक निजी समझौता भी कर लिया।
मेरे पिता सेल्समैन थे।
मदर सुपीरियर नेपल्स की थीं।
पीछे मुड़कर देखूँ तो, सेल्समैन पिता और नेपल्स की मदर सुपीरियर का यह मेल उसके बाद हुई लगभग हर बात को समझा देता है।
ज़्यादा ध्यान खींचे बिना, मेरे पिता ने यह भी पक्का किया कि कॉन्वेंट को जिलेट की प्रचार-सामग्री लगातार मिलती रहे।
ख़ासकर प्लास्टिक की थैलियाँ।
पाँच सौ कार्टन।
उन बरसों में उनका मोल सोने के बराबर था।
मिलना मुश्किल।
महँगी।
अनिवार्य।
सिस्टर्स को वे बहुत पसंद थीं।
जब भी स्टॉक ख़त्म होने को आता, टेलीफ़ोन बज उठता।
फ़ोर्चेल्ला की मदर सुपीरियर मारिया फ़्रांका।
“मिस्टर फ्रेगा, शायद आप किसी दिन अभिवादन के लिए आ सकें।”
तभी मैंने एक अहम फ़र्क़ सीखा।
एक होता था आध्यात्मिक अभिवादन।
और एक होता था सामाजिक अभिवादन।
एक दिन सेल्स डायरेक्टर, राफ़ाएले दी तुल्लियो, ने मेरे पिता को ढूँढ़ते हुए घर पर फ़ोन किया।
उनकी बदक़िस्मती से, वे मिल भी गए।
“फ्रेगा, सुप्रभात। कैसे हैं?”
“ठीक हूँ, डॉक्टर साहब। शुक्रिया। लेकिन यह कोई शिष्टाचार वाला फ़ोन तो नहीं है।
कहिए।”
“मुख्यालय में हम सब जिज्ञासु हैं।
हम समझना चाहते हैं कि एक अकेले सेल्समैन ने पूरे इटली में बाँटी गई सारी प्रचार-सामग्री का तीस प्रतिशत कैसे खपा लिया।
बस जिज्ञासा।
इससे ज़्यादा कुछ नहीं।
हमने आपको प्लास्टिक की थैलियों के लगभग बत्तीस पैलेट पहुँचाए हैं।
हम सोच रहे हैं कि धंधा कैसा चल रहा है।
जिलेट का धंधा नहीं।
प्लास्टिक-थैलियों का धंधा।
क्या आप उन्हें बेच रहे हैं?
मुनाफ़ा कमा रहे हैं?
या आप समझाना चाहेंगे कि आख़िर हो क्या रहा है?”
मेरे पिता ज़रा भी नहीं हिचकिचाए।
“मैं वेटिकन की मदद कर रहा हूँ।
उनके साधन सीमित हैं।
कोई बजट नहीं।
रेज्जो कैलाब्रिया की सेंट विंसेंट की सिस्टर्स ने, जिनके यहाँ मेरा बेटा बड़ा हो रहा है, अपने परोपकार के काम में एक छोटी-सी साझेदारी की गुज़ारिश की थी।
जैसा आपने मुझे सिखाया है, डॉक्टर साहब, मैंने इस पहल का कोई प्रचार नहीं किया।
मैं जानता हूँ कि आप ऐसे काम चुपचाप होना पसंद करते हैं।
कोई प्रचार नहीं।
जिलेट का तरीक़ा।”
ख़ामोशी।
लंबी ख़ामोशी।
आख़िरकार:
“ठीक है, फ्रेगा।
मैं और सामग्री भेज दूँगा।”
आठ साल तक सिस्टर्स ने एक भी प्लास्टिक की थैली नहीं ख़रीदी।
एक सवाल का जवाब आज तक नहीं मिला।
और अगर उन्होंने इस पूरे मामले को धंधा बना लिया हो तो?
वे नन थीं।
लेकिन वे औरतें भी थीं।
किसी ने जाँच नहीं की।
बोर्डिंग स्कूल के पहले महीनों में कम से कम तीन ऐसी घटनाएँ हुईं जिनसे सिस्टर्स बुरी तरह परेशान हो गईं।
मुझे वे बिल्कुल सामान्य लगीं।
पहली घटना लुका-छिपी के खेल के दौरान हुई।
जब भी हम खेलते, मैं हर बार किसी न किसी तरह सिस्टर्स के निजी कमरों में जा पहुँचता।
मैं जिज्ञासु था।
मैं देखना चाहता था कि सिर ढके बिना नन कैसी दिखती हैं।
मेरी सबसे बड़ी खोज थी एक सिस्टर, जिसके बाल लगभग खोपड़ी तक मुँडे हुए थे।
उसके बाद, तलाशी की हर टोली एक ही चेतावनी से शुरुआत करती थी।
“हर जगह देखो।
वह शैतान कहीं भी छिपा हो सकता है।”
मैं उनका बुरा सपना बन चुका था।
यह एहसास पूरी तरह दोनों तरफ़ से था।
दूसरी घटना सुबह की मास-प्रार्थना के दौरान हुई।
हर दिन साढ़े दस बजे, चैपल से निकलते हुए बच्चे क़तार में लग जाते।
एक सिस्टर अपनी माला आगे बढ़ाती और एक सीधा-सा सवाल पूछती।
“धरती पर सबसे ताक़तवर हस्ती कौन है?”
सब वही जवाब देते जो मंज़ूर किया गया था।
“ईसा मसीह।”
फिर वे माला चूमते।
एक सुबह मैंने इस रस्म में एक छोटा-सा बदलाव कर दिया।
माला चूमने के बजाय, मैंने सिस्टर का चोगा चूम लिया।
फिर मैंने कहा:
“मेरे पिताजी कहते हैं कि औरतें भगवान से भी ज़्यादा ताक़तवर होती हैं।”
प्रतिक्रिया फ़ौरन आई।
दोपहर के खाने से पहले ही मेरे माता-पिता को तलब कर लिया गया।
संस्था उस शैतान को निकाल बाहर करना चाहती थी।
एक काफ़ी उदार चेक ने पाप को चिंता में बदल दिया।
चिंता हैरान कर देने वाली तेज़ी से ग़ायब हो गई।
चेक में छह शून्य थे।
पुराने इतालवी लीरा में मनाने की ग़ज़ब की ताक़त थी।
साल मासूमियत की हिफ़ाज़त में रूमानी ढंग से गुज़रते गए।
केक-उत्सव बस मुफ़्त में खाने के मौक़े थे।
नाटक सच बोलने का मौक़ा था।
जब भी मैं राजकुमार बनता, दर्शकों को बता देता कि राजकुमारी को चूमना नहीं चाहिए, क्योंकि वह बदसूरत है और उसकी साँस से बदबू आती है।
शिक्षक इससे सहमत नहीं थे।
आख़िरकार पाँचवीं कक्षा आ पहुँची।
फिर आख़िरी परीक्षा।
समिति के एक सदस्य ने अपने मन का एक निजी ख़याल सबके सामने फिसल जाने दिया।
“आख़िरकार।
इससे पीछा छूट रहा है।”
सब कुछ निपटा हुआ लग रहा था।
सब कुछ ख़त्म हुआ लग रहा था।
मैंने तीस साल इंतज़ार किया।
फिर मैं लौटा।
मैंने जिलेट रेज़र ब्लेड का एक ऑर्डर दर्ज किया।
अग्रिम भुगतान।
किसी ने कभी नहीं पूछा कि ऐसा मुमकिन कैसे हो गया।
इकसठ साल बीत चुके हैं।
आज भी सवाल बाक़ी हैं।
हाल ही में मेरी बेटी ने मेरी ओर देखा और कहा:
“माफ़ करना, नांदो।
मैं तुम्हें पापा नहीं कहती।
लेकिन तुम आख़िर हो क्या बला?”
आह।
अहाहाहाह।
फर्दिनांदो फ्रेगा
जिलेट मैन ⚔️
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