मेरी लेडी विल्किंसन

मेरी लेडी विल्किंसन — विल्किंसन गाथा, अध्याय 10

विल्किंसन गाथा · हिंदी संस्करण  ·  अंक 10

मेरी लेडी विल्किंसन


मैंने उसी शाम उन्हें एक संदेश भेजा कि मैं पाँच दिन रुकूँगा, और पूछा कि वे यह समय कैसे बिताना चाहेंगी।

फ़ोन नीचे रखने भर का वक़्त मुश्किल से मिला।

दो मिनट भी नहीं बीते थे कि उनका जवाब आ गया।

“कल सुबह ग्यारह बजे।

यहाँ, ईटन में मेरे विला पर।

हम अंग्रेज़ी चाय पिएँगे।

बताओ, तुम कहाँ ठहरे हो।

मैं पता अपने ड्राइवर को दे दूँगी और वह तुम्हें लेने आ जाएगा।”

मैं मुस्कुराया।

इंतज़ाम फ़ौजी था।

नफ़ासत ब्रिटिश थी।

न्योता ऐसा कि ठुकराया न जा सके।

मैंने फ़ौरन जवाब दिया।

“10:30 बजे मैं Four Seasons होटल के सामने खड़ा मिलूँगा।

मैं पास ही ठहरा हूँ।

पैदल आ जाऊँगा।”

फिर दूसरा संदेश भेजने से पहले मैं कुछ पल उसी संदेश को देखता रहा।

इस मुलाक़ात में मैं सचमुच डूब चुका था।

शायद उससे ज़्यादा, जितना मानने को मैं तैयार था।

मुझे लग रहा था कि मैं किसी ऐसी रस्म की तैयारी कर रहा हूँ जिसका कोई संचालक नहीं।

अगले दिन हम दोनों ठीक वक़्त पर पहुँचे।

ड्राइवर का नाम डोमिनिक था।

फ़्रांसीसी मूल का।

विनम्र।

संयत।

पूरी तरह तहज़ीबदार।

जब हम उन सड़कों से गुज़र रहे थे, एक अजीब-सा एहसास मुझ पर छा गया।

जैसे मैं वहाँ पहले भी आ चुका था।

मेरी याद अचानक 1993 में लौट गई।

वही जगह।

जिलेट के एक पुराने सहकर्मी के साथ।

मैंने सोचा, महज़ इत्तफ़ाक़ है।

उन तोहफ़ों में से एक, जो ज़िंदगी कभी-कभी बिना माँगे दे देती है।

मैं क़िले में दाख़िल हुआ।

अपनी सहज विनम्रता के चलते वे उसे विला ही कहती रहीं।

मेरे लिए वह क़िला था।

मेरी ज़िंदगी में दूसरा, जहाँ मैं गया था।

पहला था ट्रांसिल्वेनिया का ब्रान क़िला।

वहाँ मैं एक असाधारण निदेशक से मिलने गया था, एक शानदार औरत से, जो काउंट व्लाद की मेज़बान थी, वही जिसे लोग सूली चढ़ाने वाले ड्रैकुला के नाम से ज़्यादा जानते हैं।

मैगी मुझे सोफ़े के पास एक आरामकुर्सी पर बैठी मिलीं।

उन्होंने गर्मजोशी से मेरा स्वागत किया।

सहज ही मैंने उनका हाथ चूमने के लिए हाथ बढ़ाया।

पर उन्होंने फ़्रांसीसी दस्तूर अपनाया।

तीन चुंबन।

हम बस दो लोग थे, जिन्हें पीढ़ियों ने अलग किया था और एक ऐसी कहानी ने जोड़ा था जिसे हम दोनों में से किसी ने अभी पूरा नहीं सुनाया था।

और मेरे आने के बाद पहली बार लंदन मुझे शहर नहीं लगा।

मंज़िल लगा।

मैंने उनसे कहा कि जहाँ तक मुझे मालूम है, अंग्रेज़ी चाय की रस्म शाम पाँच बजे की होती है।

कम से कम स्कूल में तो मुझे यही सिखाया गया था।

पर सुबह ग्यारह बजे क्या बदल गया था, यह मेरी समझ में नहीं आ रहा था।

वे मुस्कुराईं।

फिर उस भरोसे के साथ जवाब दिया जो सिर्फ़ उन्हीं के पास होता है जो इतना जी चुके हों कि अब किसी को क़ायल करने की ज़रूरत न रहे।

“अंग्रेज़ चाय तब पीते हैं जब वे आराम करते दिखते हैं।

असल में यही वह घड़ी है जब वे सोचते हैं।

यही वह घड़ी है जब वे फ़ैसले करते हैं।

कोई तय वक़्त नहीं है।

पाँच बजे की चाय तो बस एक फ़ॉर्मैट है, जिसे किसी ने काम के बीच विराम को जायज़ ठहराने के लिए संस्था बना दिया।”

मैं उन्हें टोके बिना सुनता रहा।

वे एक मज़बूत औरत थीं।

दो-टूक।

पक्के इरादे वाली।

शालीन।

अथक।

अडिग।

वे इस्पात की बनी थीं।

अपनी तलवारों की तरह।

वे मैगी थीं।

वे मेरी लेडी विल्किंसन थीं।


फर्दिनांदो

PDF ← विल्किंसन गाथा

विल्किंसन गाथा
01 सुश्री विल्किंसन — इस्पात की लेडी · 02 जिलेट मैन के अनुसार विल्किंसन की कहानी · 03 शिक, विल्किंसन और तिहरी बदक़िस्मती · 04 जंग में दो तलवारें: जिलेट बनाम विल्किंसन · 05 विल्किंसन की बाज़ार हिस्सेदारी · 06 विल्किंसन स्वॉर्ड: घर की बदली · 07 विल्किंसन की आईने वाली ग़लती · 08 लेडी विल्किंसन स्वॉर्ड · 09 लेडी विल्किंसन & नैरेटिव · 10 मेरी लेडी विल्किंसन · 11 मौसी विल्किंसन से मुलाक़ात · 12 विल्किंसन के लंदन में राज़ खोलता विराम · 13 विल्किंसन के साथ अगला दिन · 14 एक विल्किंसन विदाई की ख़ामोशी · 15 सुश्री विल्किंसन ने मुझे भांजा कहा