वॉल स्ट्रीट का ड्रेस कोड
WALL STREET · 04
वॉल स्ट्रीट गाथा
वॉल स्ट्रीट मानती है कि हर कमरे का एक ड्रेस कोड होता है।
सूट। टाई। चमकाए हुए जूते।
मंज़ूरशुदा भाषा। मंज़ूरशुदा महत्वाकांक्षाएँ। मंज़ूरशुदा सपने।
जो बात कोई नहीं समझाता, वह यह है कि ड्रेस कोड कभी ताक़त की पहचान के लिए नहीं बनाया गया था।
वह अपनेपन की पहचान के लिए बनाया गया था।
सूट पहना आदमी कमरे से कहता है: “मुझे नियम मालूम हैं।”
जो आदमी बिना सूट के भीतर आता है, वह एक ज़्यादा ख़तरनाक सवाल पूछता है: “इन्हें लिखा किसने?”
ज़्यादातर करियर ढल जाने से बनते हैं।
भाषा सीखो। रस्में सीखो। ओहदों की सीढ़ी सीखो।
सीखो कि कब बोलना है। सीखो कि कब चुप रहना है।
फिर तीस साल इसे आज़ादी कहते हुए बिता दो।
पर हर बाज़ार का सामना देर-सबेर एक अलग ही प्रजाति से होता है।
कोई ऐसा जिसके पास पहले से वह चीज़ है जिसे बाज़ार जारी नहीं कर सकता।
पहचान।
उस आदमी को सँभालना मुश्किल हो जाता है। किसी ख़ाने में रखना मुश्किल। ख़रीदना मुश्किल।
क्योंकि संस्थाएँ हितों से मोलभाव करती हैं।
विश्वासों के आगे वे लड़खड़ा जाती हैं।
हैरानी की बात यह नहीं कि वॉल स्ट्रीट लकीर पर चलने वालों को इनाम देती है।
हैरानी की बात यह है कि लकीर पर चलना कितनी बार ख़ुद को ताक़त समझ बैठता है।
असली ताक़त तब दिखती है जब आदमी को उस पोशाक की ज़रूरत नहीं रह जाती।
उस पल कमरा बदल जाता है।
इसलिए नहीं कि नियम ग़ायब हो गए।
इसलिए कि आख़िरकार कोई बिना इजाज़त माँगे भीतर चला आया।
फर्दिनांदो फ्रेगा
ब्लेडफ्रेगा
वॉल स्ट्रीट गाथा
बाक़ी गाथाएँ देखें
The Corpus · नक़्शे · पुस्तकालय · Genesis · International · Vatican · Gillette Saga · Wall Street Saga · P&G Semantic · Wood · संपर्क
