वॉल स्ट्रीट मुक्ति
WALL STREET · 13
आज़ादी आधुनिक सभ्यता के सबसे ज़्यादा बेजा इस्तेमाल किए गए शब्दों में से एक है।
लोग सोचते हैं आज़ादी का मतलब है अकेला होना।
आत्मनिर्भर होना।
किसी की ज़रूरत न होना।
किसी चीज़ पर निर्भर न होना।
वे ग़लत हैं।
आदमी अलग-थलग होकर भी क़ैदी हो सकता है।
आदमी लोगों से घिरा होकर भी आज़ाद हो सकता है।
आज़ादी तभी शुरू होती है जब भीतर का गृहयुद्ध ख़त्म होता है।
चिकित्सा की दुनिया प्रोटोकॉल बनाती है।
मनोवैज्ञानिक।
मनोचिकित्सक।
दवाओं की योजनाएँ।
इलाज के रास्ते।
पूरी की पूरी व्यवस्थाएँ उसकी मरम्मत के लिए रची जाती हैं जो टूटा हुआ दिखता है।
और शायद उनमें से बहुत-सी मदद भी करती हैं।
पर एक सवाल है जिसका जवाब नहीं मिलता।
हम आख़िर मरम्मत किसकी करना चाह रहे हैं?
इंसान की?
या अपेक्षा से उसके भटकाव की?
समाज को ढाँचा प्यारा है क्योंकि ढाँचा सत्ता की हिफ़ाज़त करता है।
हर पीढ़ी तरक़्क़ी और विकास की अंतहीन बातें करती है।
फिर भी ज़्यादातर लोग बस उसी पुरानी मेज़ के इर्द-गिर्द अपनी कुर्सियाँ नए सिरे से जमाने में लगे हैं। चालाक लोग नियम दोबारा लिखते हैं।
महत्वाकांक्षी लोग पत्ते बाँटने वाले बन जाते हैं।
भोला खेलता रहता है।
और फिर मेरे जैसे लोग हैं।
वे लोग जो मेज़ को देखते हैं और खेल पहचान लेते हैं।
अगर आपको पहले से पता है कि पत्ते बाँटने वाला बेईमानी कर रहा है, तो बैठना ही क्यों?
हैरान होने का नाटक क्यों?
धाँधली वाली व्यवस्था से मोल-भाव क्यों करते रहना?
जवाब सीधा है।
आप उठकर चले जाते हैं।
ग़ुस्से में नहीं।
हार मानकर नहीं।
साफ़ नज़र के साथ।
बरसों पहले, मैंने उस कंपनी से एक सबक़ सीखा जिसने अनजाने में मेरी ज़िंदगी को गढ़ा। जिलेट ने मुझे शेव करना कभी नहीं सिखाया।
जिलेट ने मुझे हटाना सिखाया।
काम की चीज़ को बेकार से अलग करना।
ज़रूरत और लगाव में फ़र्क़ करना।
शोर को मिटा देना।
ब्लेड की कोई विचारधारा नहीं होती।
ब्लेड का बस मक़सद होता है।
वह उसे काट देता है जिसकी अब कोई जगह नहीं।
यही मुक्ति है।
दुनिया को बदलना नहीं।
अपने दुश्मनों को हराना नहीं।
बहस जीतना नहीं।
बस जो ग़ैरज़रूरी है उसे हटाते जाना, जब तक कि जो बचे वह सच हो।
आज़ादी का सबसे बड़ा औज़ार क़ानून नहीं है।
कोई सरकार नहीं।
कोई डायग्नोसिस नहीं।
कोई संस्था नहीं।
वह एक ब्लेड है।
और हर सार्थक ज़िंदगी को देर-सबेर एक ब्लेड की ज़रूरत पड़ती है।
क्योंकि समझदारी शायद ही कभी इस बात में होती है कि हम क्या हासिल करते हैं।
वह इस बात में होती है कि हम आख़िरकार क्या काट फेंकने का फ़ैसला करते हैं।
फर्दिनांदो फ्रेगा
ब्लेडफ्रेगा
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