मन के कमरों की गाथा
बिना पते वाला एक घर, जिसमें वे सब बसे हैं जिन्होंने कभी ख़ुद को समझने की कोशिश की। दस कमरे, दस दरवाज़े, और सहज-प्रवृत्ति, पागलपन और उनके बीच की हर चीज़ से होकर गुज़रती एक लंबी राह।
कहानियाँ · 11 अध्याय
- 01 सहज-प्रवृत्ति — दिशा PDF
- 02 अंतर्ज्ञान — पूर्वाभास PDF
- 03 बुद्धि — समझ PDF
- 04 मूर्खता — जड़ता PDF
- 05 पागलपन — अति PDF
- 06 सचेत पागलपन — दृष्टि PDF
- 07 आनुवंशिकी — उद्गम PDF
- 08 शिक्षा — निर्माण PDF
- 09 व्यवहार — अभिव्यक्ति PDF
- 10 लोग — रूपांतरण PDF
- 11 बाहरी कमरा PDF
यह गाथा हिंदी में भी मौजूद है, ताकि हर कोई किसी कहानी के भीतर मुस्कुरा सके — बस इस मक़सद से कि गहराई और जानकारी मिले, और लेखक की मुस्कान भेंट हो सके।
